Thursday, November 19, 2009

कौन हैं आप यह महत्वपूर्ण नहीं!

आप बहुत बड़े हो सकते हैं.उच्च पद पर आसीन हो सकते है, बड़े ब्लॉगर हो सकते हैं, बड़े साहित्यकार हो सकते हैं, दार्शनिक भी हो सकते हैं, बड़े और गरिष्ठ वरिष्ठ कवि भी, बड़े कलाकार भी,बड़े व्यवहार कुशल भी,बड़े लेखक भी,बड़े व्यंग्यकार भी.लेकिन इन सबसे से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आप परिणाम कैसे दे रहे हैं. यानि जो आप कर रहे हैं या करना चाह रहे हैं वह हासिल हो भी रहा है या नहीं या फिर आप बिना सूत-कपास के कोरी लट्ठमलट्ठा किये जा रहे हैं. यदि किसी काम का परिणाम अच्छा है तो यह उतना महत्वपूर्ण नहीं कि वह काम किसने किया.इट्स द रिजल्ट्स दैट मैटर्स.

एक कहानी सुनें. एक बार के बहुत बड़े पुजारी,संत,योगाचार्य की मृत्यु हुई और वह ऊपर पहुंच गये. स्वर्ग के द्वार पर. और वहां खड़े होकर वह अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगे. उनके आगे एक व्यक्ति खड़ा था. उसने अच्छे,चमकदार कपड़े पहने हुए थे, आखों मे ग़ॉगल्स लगाये हुए थे, रंगीली शर्ट,चमड़े की जैकेट और जींस .

धर्मराज ने उस व्यक्ति से पूछा,कृपया मुझे बताएँ कि आप कौन हैं ताकि मैं जान सकूँ कि आपको स्वर्ग के द्वार से अंदर जाने दूँ या नहीं.

उस व्यक्ति ने उत्तर दिया मैं बंता सिंह हूं. मैं नई दिल्ली में टैक्सी ड्राइवर था.

धर्मराज ने अपना बही खाता खोला. उसे ध्यान से देखते हुए बंता सिंह से मुस्कराते हुए कहा

कृपया यह रेशमी वस्त्र पहन लें और सोने के द्वार से सोने के सिहांसन की ओर जायें.

अब संत की बारी थी.धर्मराज ने उनसे भी वही प्रश्न पूछा कि वह कौन हैं. उन्होंने सीधे खड़े होकर और विश्वास भरी तेज आवाज में उत्तर दिया.

मैं हूं संत शिरोमणि बाबा अलां फलां 1008. मैं अलां फलां मंदिर का प्रमुख पुजारी था. मैं पिछ्ले चालीस साल से लोगों को ईश्वर के बारे में बता रहा हूँ.

धर्मराज ने फिर अपना बही खाता खोला और संत से कहा.

आप कृपया यह सूती वस्त्र पहने और लकड़ी के द्वार से लकड़ी के सिंहासन की ओर प्रस्थान करें.

संत को गुस्सा आ गया. उन्होने धर्मराज से पूछा. यह आपका कैसा न्याय है भगवन. उस सदा गाली देते रहने वाले, ठीक से गाड़ी भी ना चला पाने वाले ड्राइवर को तो आपने रेशमी वस्त्र और सोने का सिंहासन दिया और मुझे, जिसने लोगों को उपदेश देने में अपना सारा जीवन लगा दिया, उसे सूती वस्त्र और लकड़ी का सिंहासन. ऐसा क्यों भगवन.

“परिणाम मेरे पुत्र, केवल परिणाम, “ परिणाम ही है जिसके कारण ऐसा हुआ.

जब तुम लोगों को ईश्वर की प्रार्थना करने का उपदेश देते थे तो लोग सोते थे और जब बंता सिंह टैक्सी चलाता था तो लोग सही सलामत घर पहुंचने के लिये ईश्वर की प्रार्थना करते थे.

तो शिक्षा यह मिली कि आप कौन है कितने बड़े हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि यह महत्वपूर्ण है आपका जो कर रहे हैं उसका परिणाम क्या हो रहा है.

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