Monday, January 18, 2010

Dankaur Kavi

गिनने लगा

मुफलिसी में, घर में सबकी ख़ामियाँ गिनने लगा
हद तो ये, मैं बालकों की रोटियाँ गिनने लगा

देख ले

मिट गये हम उफ़ न की है देख ले
किस कदर दीवानगी है देख ले
ज़िन्दगी भर साथ देने की कसम
यार पूरी ज़िन्दगी है देख ले
ये हवेली कल शहर की शान थी
आज ये सूनी पड़ी है देख ले

इससे पहले मैक़दा हो जाये बन्द
ख़त्म है या कुछ बची है देख ले


written by-pawan dixit(lives in dankaur)
he is a GREAT POET who is shinning far right now.

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