Thursday, February 11, 2010

क्या करोगे तुम?(मेरी जिंदगी का पहला खुद का लेख)

मुझे पढो तो ज़रा अहतियात से पढना क्योकि
वक़्त वो भी अजीब था जब तू मेरे करीब था.........

यादों की डगर में जब हो आशियाना हमारा
फूलो की ख़ुश्बू की तरह रहना सांसो मे हमारी........

रात के सन्नाटों में जब कोई दर्द छेड़े तराना
जब बुरा लगने लगे तुमको ये सारा जमाना.......

ख़ामोशियों की वो धीमी सी आवाज़ में सुनाना
लिखा है जिस गजल को इंतज़ार में मेरी.........

हर तरफ है दरिन्दे दुनिया में यू तो बस अब
मिले फिर भी कोई तुम्हे मुज जैसा तो........

लिखा है जिस गजल को इंतज़ार में मेरी
बस वही गजल आ के मुझे सुना जाना........

ज़िन्दगी प्यारी सही लेकिन हमे मरना तो है.......
फिर यादे सताएगी तुमको हमारी, रूह बनकर

क्या करोगे तब तुम उस ग़ज़ल के पन्नो का
लिखा है जिस गजल को इंतज़ार में मेरी...........
by- ankit agrawal

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