बेतुका बयान
जनता को भड़काने और बरगलाने वाले बयान देने के लिए कुख्याति अर्जित कर चुके समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान एक बार फिर अपनी आदत से बाज नहीं आए। इस बार उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधने के फेर में पहले तो यह बेतुका सवाल पूछा कि राहुल गांधी किसी मुस्लिम को प्रधानमंत्री कैसे बनाएंगे और फिर इस नतीजे पर पहंुच गए कि केंद्र सरकार में सिर्फ एक मुस्लिम मंत्री है और वह भी उस कश्मीर का जिसके बारे में यह तय नहीं है कि वह किस देश का हिस्सा है। आखिर जब राहुल गांधी ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं कि वह किसी मुस्लिम को प्रधानमंत्री बनाने की तैयारी कर रहे हैं तब फिर इस संदर्भ में आजम ने सवाल ही क्यों उछाला? उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वह इस नतीजे पर कैसे पहुंच गए कि कश्मीर के बारे में अभी यह तय नहीं हो सका है कि वह भारत का हिस्सा है अथवा पाकिस्तान का? इस तरह का बयान तो कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की फिराक में रहने वाले पाकिस्तानी नेता भी देने से हिचकते हैं। आजम खान से यह तो पूछा ही नहीं जाना चाहिए फारुख अब्दुल्ला को वह दुनिया के किस हिस्से का नेता मानते हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी से यह अपेक्षा अवश्य की जाती है कि वह अपने नेता से जवाब तलब करे? आजम खान सरीखे नेताओं के ऐसे बयानों को तूल नहीं दिया जाना चाहिए, लेकिन समाजवादी पार्टी की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह उन पर अंकुश लगाए, क्योंकि ऐसे बयान उसकी उस अपेक्षा पर पानी फेर सकते हैं जिसे पूरा करने की चाहत में आजम को फिर से पार्टी में लाया गया है। आजम खान ने अपने बयान को लेकर जो सफाई दी उसका कोई मूल्य-महत्व नहीं, क्योंकि उन्होंने जो कुछ कहा वह टीवी चैनलों के कैमरों में कैद है। अब वह जमाना नहीं रहा कि कोई नेता उल्टा-सीधा बयान दे और बात बिगड़ने पर यह कहकर सारा दोष मीडिया पर थोप दे कि उसकी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। यदि आजम खान यह सोच रहे हैं कि वह भड़काऊ बयानों के जरिये कांग्रेस का अहित और सपा का हित कर सकेंगे तो यह संभव नहीं। इससे तो वह अपनी अस्वीकार्यता ही बढ़ाएंगे।
आजम को कहना पड़ा, कश्मीर भारत का (बयान से पलटे आजम)
विवादास्पद बयानों के लिए चर्चित सपा नेता आजम खां के ताजा बयान पर फिर बवाल मच गया है। इस बार उन्होंने कश्मीर को भारत का अंग होने पर ही सवाल उठा दिए। कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाना बनाते-बनाते आजम बोले कि अभी तो कश्मीर का भूगोल ही तय नहीं है कि वो भारत में है पाकिस्तान में। बदायूं में मंगलवार शाम पत्रकारों से बातचीत के दौरान आजम, राहुल गांधी पर हमलावर थे। उन्होंने कहा कि राहुल कैसे किसी मुसलमान को प्रधानमंत्री बनाएंगे। कांग्रेस में तो एक ही मुसलमान मंत्री गुलाम नबी आजाद हैं। आजाद भी भारत के नहीं..बल्कि कश्मीर के हैं। उस कश्मीर के, जिसका अभी भूगोल ही तय नहीं है कि वह भारत में है या पाकिस्तान में। हालांकि आजम यह भूल गए कि मनमोहन की कैबिनेट में उत्तर प्रदेश से ही एक मुस्लिम मंत्री सलमान खुर्शीद हैं। फारुख अब्दुल्ला, सलमान खुर्शीद, ई. अहमद, सुल्तान अहमद के मंत्री होने की भी शायद उन्हें जानकारी नहीं होगी। आजम ने बुधवार को रामपुर में मीडिया के सामने कश्मीर मुद्दे पर सफाई पेश की। कहा कि कल उन्होंने बदायूं में कश्मीर मुद्दे पर पत्रकारों से बात की थी लेकिन हमारे सवाल को ही जवाब के रूप में पेश कर दिया गया। हम हमेशा कहते रहे हैं कि कश्मीर भारत का अटूट अंग था, है और रहेगा। कश्मीर का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय है। जिसे कांग्रेस ने हवा दी है। गुलाम नबी आजाद ने तो मुख्यमंत्री रहते अलगाववादी ताकतों से समझौता कर सरकार चलाई। अब कांग्रेस ने केंद्र सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बना रखा है। इस सफाई में भी आजम ने एक नया विवाद पैदा कर दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की समस्या को सोशल प्रॉब्लम बताया जाता है, आर्थिक पैकेज की बात की जाती है जबकि जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों को आतंकवादी बताया जाता है। क्या वे भारत के निवासी नहीं हैं। फिर उनके साथ पक्षपात क्यों? जब इस्लामिक आतंकवाद जुमला इस्तेमाल होता है तो हमें दुख होता है।
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sahi hai.........
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