जो शिरडी में आयेगा, आपद दूर भगाएगा ।। 1 ।।
चढे समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुःख की पीढ़ी पर ।। 2 ।।
त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त-हेतु दौड़ा आऊंगा ।। 3 ।।
मन में रखना दृढ़ विश्वास, करें समाधि पूरी आस ।। 4 ।।
मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो ।। 5 ।।
मेरी शरण आ खाली जाये, हो तो कोई मुझे बताये ।। 6 ।।
जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रुप हुआ मेरे मन का ।। 7 ।।
भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा ।। 8 ।।
आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वह नही हैं दूर ।। 9 ।।
मुझ में लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया ।। 10 ।।
धन्य-धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य ।। 11 ।।
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शायद आप मेरी लिखी साईं प्रार्थना पसंद आये हलिंकी बावा को पसंद नहीं आयी ( पहली और आखिरी बार साईं की शरण में गया था उस दिन )
ReplyDeletehttp://satish-saxena.blogspot.com/2008/06/blog-post_05.html
सतीश जी मन में श्रद्या होनी चाहेये सबी काम पुरे होगे
ReplyDeleteधन्यवाद
OM SAI RAM
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