Thursday, December 23, 2010

आजम को कहना पड़ा, कश्मीर भारत का

बेतुका बयान


जनता को भड़काने और बरगलाने वाले बयान देने के लिए कुख्याति अर्जित कर चुके समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान एक बार फिर अपनी आदत से बाज नहीं आए। इस बार उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधने के फेर में पहले तो यह बेतुका सवाल पूछा कि राहुल गांधी किसी मुस्लिम को प्रधानमंत्री कैसे बनाएंगे और फिर इस नतीजे पर पहंुच गए कि केंद्र सरकार में सिर्फ एक मुस्लिम मंत्री है और वह भी उस कश्मीर का जिसके बारे में यह तय नहीं है कि वह किस देश का हिस्सा है। आखिर जब राहुल गांधी ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं कि वह किसी मुस्लिम को प्रधानमंत्री बनाने की तैयारी कर रहे हैं तब फिर इस संदर्भ में आजम ने सवाल ही क्यों उछाला? उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वह इस नतीजे पर कैसे पहुंच गए कि कश्मीर के बारे में अभी यह तय नहीं हो सका है कि वह भारत का हिस्सा है अथवा पाकिस्तान का? इस तरह का बयान तो कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की फिराक में रहने वाले पाकिस्तानी नेता भी देने से हिचकते हैं। आजम खान से यह तो पूछा ही नहीं जाना चाहिए फारुख अब्दुल्ला को वह दुनिया के किस हिस्से का नेता मानते हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी से यह अपेक्षा अवश्य की जाती है कि वह अपने नेता से जवाब तलब करे? आजम खान सरीखे नेताओं के ऐसे बयानों को तूल नहीं दिया जाना चाहिए, लेकिन समाजवादी पार्टी की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह उन पर अंकुश लगाए, क्योंकि ऐसे बयान उसकी उस अपेक्षा पर पानी फेर सकते हैं जिसे पूरा करने की चाहत में आजम को फिर से पार्टी में लाया गया है। आजम खान ने अपने बयान को लेकर जो सफाई दी उसका कोई मूल्य-महत्व नहीं, क्योंकि उन्होंने जो कुछ कहा वह टीवी चैनलों के कैमरों में कैद है। अब वह जमाना नहीं रहा कि कोई नेता उल्टा-सीधा बयान दे और बात बिगड़ने पर यह कहकर सारा दोष मीडिया पर थोप दे कि उसकी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। यदि आजम खान यह सोच रहे हैं कि वह भड़काऊ बयानों के जरिये कांग्रेस का अहित और सपा का हित कर सकेंगे तो यह संभव नहीं। इससे तो वह अपनी अस्वीकार्यता ही बढ़ाएंगे।







आजम को कहना पड़ा, कश्मीर भारत का (बयान से पलटे आजम)
विवादास्पद बयानों के लिए चर्चित सपा नेता आजम खां के ताजा बयान पर फिर बवाल मच गया है। इस बार उन्होंने कश्मीर को भारत का अंग होने पर ही सवाल उठा दिए। कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाना बनाते-बनाते आजम बोले कि अभी तो कश्मीर का भूगोल ही तय नहीं है कि वो भारत में है पाकिस्तान में। बदायूं में मंगलवार शाम पत्रकारों से बातचीत के दौरान आजम, राहुल गांधी पर हमलावर थे। उन्होंने कहा कि राहुल कैसे किसी मुसलमान को प्रधानमंत्री बनाएंगे। कांग्रेस में तो एक ही मुसलमान मंत्री गुलाम नबी आजाद हैं। आजाद भी भारत के नहीं..बल्कि कश्मीर के हैं। उस कश्मीर के, जिसका अभी भूगोल ही तय नहीं है कि वह भारत में है या पाकिस्तान में। हालांकि आजम यह भूल गए कि मनमोहन की कैबिनेट में उत्तर प्रदेश से ही एक मुस्लिम मंत्री सलमान खुर्शीद हैं। फारुख अब्दुल्ला, सलमान खुर्शीद, ई. अहमद, सुल्तान अहमद के मंत्री होने की भी शायद उन्हें जानकारी नहीं होगी। आजम ने बुधवार को रामपुर में मीडिया के सामने कश्मीर मुद्दे पर सफाई पेश की। कहा कि कल उन्होंने बदायूं में कश्मीर मुद्दे पर पत्रकारों से बात की थी लेकिन हमारे सवाल को ही जवाब के रूप में पेश कर दिया गया। हम हमेशा कहते रहे हैं कि कश्मीर भारत का अटूट अंग था, है और रहेगा। कश्मीर का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय है। जिसे कांग्रेस ने हवा दी है। गुलाम नबी आजाद ने तो मुख्यमंत्री रहते अलगाववादी ताकतों से समझौता कर सरकार चलाई। अब कांग्रेस ने केंद्र सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बना रखा है। इस सफाई में भी आजम ने एक नया विवाद पैदा कर दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की समस्या को सोशल प्रॉब्लम बताया जाता है, आर्थिक पैकेज की बात की जाती है जबकि जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों को आतंकवादी बताया जाता है। क्या वे भारत के निवासी नहीं हैं। फिर उनके साथ पक्षपात क्यों? जब इस्लामिक आतंकवाद जुमला इस्तेमाल होता है तो हमें दुख होता है।

1 अक्टूबर 2010 से 30 सितंबर 2011 तक लागू ग्रेडेशन अनुबंध

'ए' ग्रेड (एक करोड़ रुपये)
* राहुल द्रविड़
* सचिन तेदुलकर
* गौतम गंभीर
* सुरेश रैना
* महेन्द्र सिंह धोनी
* वीरेंद्र सहवाग
* जहीर खान
* वीवीएस लक्ष्मण
* हरभजन सिंह

बी' ग्रेड (50 लाख रुपये)

* युवराज सिंह
* ईशांत शर्मा
* आशीष नेहरा
* प्रवीण कुमार
* विराट कोहली
* मुरली विजय
* प्रज्ञान ओझा
'सी' ग्रेड (25 लाख रुपये)
* एस श्रीसंथ
* अमित मिश्रा
* आर अश्विन
* रोहित शर्मा
* चेतेश्वर पुजारा
* रविंदर जडेजा
* अभिमन्यु मिथुन
* विनय कुमार
एक अक्टूबर 2010 से बीसीसीआई का नया अनुबंध भारतीय टीम के आक्रामक बल्लेबाज सुरेश रैना एक बार फिर खराब फार्म से जूझ रहे युवराज सिंह को पीछे छोड़ केंद्रीय अनुबंध के शीर्ष ग्रेड में पहली बार शामिल हो गए जिसमें कप्तान धौनी, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ समेत नौ खिलाड़ी शामिल हैं। बीसीसीआई ने एक और कदम उठाते हुए ग्रेड-डी को हटा दिया है जिसके बाद अब सिर्फ तीन ही ग्रेड रहेंगे।
बीसीसीआई की विज्ञप्ति के अनुसार इस तरह इस सत्र में केवल 24 खिलाडिय़ों को ही सालाना रिटेनरशिप फीस की पेशकश की गई जबकि पिछले सत्र में यह संख्या 41 थी। अगर कोई भी गैर अनुबंधीय खिलाड़ी अगले सत्र में भारत की ओर से खेलता है तो वह ग्रेड-सी में पहुंच जाएगा। ग्रेड-बी के खिलाडिय़ों को अब 40 लाख के बजाय 50 लाख रुपये मिलेंगे जबकि ग्रेड-सी में क्रिकेटरों को 25 लाख रुपये ही दिए जाएंगे। अंतिम एकादश में खेलने वाले भारतीय खिलाडिय़ों को टेस्ट मैच के लिए सात लाख, वनडे के लिए चार लाख और टी-20 मैच के लिए दो लाख रुपये मिलेंगे।
हाल में दो सीरीज के लिए टेस्ट टीम से बाहर किए गए युवराज के लिए ग्रेड-बी में फिसलना एक और झटका है। दिल्ली के बल्लेबाज विराट कोहली अपने पिछले डी-ग्रेड से सुधार करते हुए बी-ग्रेड में जगह बनाई जबकि रोहित शर्मा बी से फिसलकर ग्रेड-सी में आ गए हैं। आस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने आगाज में अर्धशतक जडऩे वाले चेतेश्वर पुजारा, कर्नाटक के तेज गेंदबाज विनय कुमार और अभिमन्यु मिथुन और तमिलनाडु के आफ स्पिनर रवि अश्विन के साथ ग्रेड-सी में पहुंच गए हैं। मुरली विजय और प्रज्ञान ओझा ने भी सुधार करते हुए बी ग्रेड में जगह बनाई। हालांकि पठान बंधु इरफान और यूसुफ, आरपी सिंह, सुदीप त्यागी, दिनेश कार्तिक, पार्थिव पटेल, मनोज तिवारी, रिद्धिमान साहा, अशोक डिंडा, शिखर धवन, अंजिक्या रहाणे, वसीम जाफर और अभिषेक नायर का कोई केंद्रीय अनुबंध नहीं होगा।

सर्वश्रेष्ठ एक दिवसीय साझेदारियां [November 18, 2010]

रन खिलाड़ी टीम विकेट
318 सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ भारत दूसरा
274 जेएएच मार्शल और बीबी मैक्कुलम न्यूजीलैंड पांचवां
258 सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर भारत सातवां
257 सलीम इलाही और अब्दुल रज्जाक पाकिस्तान दूसरा
252 सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर भारत पहला
286 थरंगा और सनथ जयसूर्या श्रीलंका तीसरा
263 आमिर सोहेल और इंजमाम-उल-हक पाकिस्तान छठा
331 सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ भारत दूसरा
275* मो. अजहरुद्दीन और अजय जडेजा भारत चौथा
252* शेन वाटसन और रिकी पोंटिंग आस्ट्रेलिया दूसरा

सबसे ज्यादा एक दिवसीय विकेट [November 18, 2010]

विकेट खिलाड़ी टीम मैच
517 मुथैया मुरलीधरन श्रीलंका 339
502 वसीम अकरम पाकिस्तान 356
416 वकार यूनुस पाकिस्तान 262
400 चमिंडा वास श्रीलंका 322
393 शान पोलाक द.अफ्रीका 303
381 ग्लेन मैक्ग्रा आस्ट्रेलिया 250
337 अनिल कुंबले भारत 271
324 ब्रेट ली आस्ट्रेलिया 186
322 सनथ जयसूर्या श्रीलंका 444
315 जवागल श्रीनाथ भारत 229

सबसे ज्यादा एक दिवसीय रन [November 18, 2010]

17598 सचिन तेंदुलकर भारत 442
13428 सनथ जयसूर्या श्रीलंका 444
13082 रिकी पोंटिंग आस्ट्रेलिया 352
11739 इंजमाम-उल-हक पाकिस्तान 378
11363 सौरव गांगुली भारत 311
11002 जैक्स कालिस द अफ्रीका 307
10765 राहुल द्रविड़ भारत 339
10405 ब्रायन लारा वेस्टइंडीज 299
9720 मोहम्मद यूसुफ पाकिस्तान 288
9619 एडम गिलक्रिस्ट आस्ट्रेलिया 287

धौनी और सचिन के नाम रहा 2010

टेस्ट और वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट हो या फिर इंडियन प्रीमियर लीग [आईपीएल] और चैंपियंस लीग, वर्ष 2010 में हर जगह महेंद्र सिंह धौनी के धुरंधरों का धमाल और सचिन तेंदुलकर के बल्ले का कमाल देखने को मिला। धौनी की अगुवाई में भारत दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम बना और वनडे क्रिकेट में लंबे अर्से बाद एशिया कप जीता।

Tuesday, December 21, 2010

3जी सेवाएं, टेलीकॉम कंपनियों को झटका,

ग्राहकों को तीसरी पीढ़ी यानी 3जी सेवाएं परोसने को बेसब्री से इंतजार कर रही टेलीकॉम कंपनियों को सरकार ने तगड़ा झटका दिया है। सरकार ने टाटा टेलीसर्विसेज और रिलायंस कम्युनिकेशंस समेत अन्य प्रमुख मोबाइल ऑपरेटरों को इन सेवाओं को पेश करने से रोक दिया है। इसके पीछे उसने सुरक्षा का हवाला दिया है। इन कंपनियों को साफ कहा गया है कि निगरानी तंत्र मुहैया कराए बगैर वे 3जी सेवाएं नहीं दे सकती हैं। ऑपरेटरों की मानें तो यह आदेश केवल मोबाइल पर वीडियो कॉल तक ही सीमित है, पर दूरसंचार विभाग (डॉट) के सूत्रों का कहना इससे जुदा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आदेश उन सभी सेवाओं पर लागू होता है, जहां निगरानी तंत्र की सुविधा उपलब्ध नहीं है। डॉट और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने सोमवार को टेलीकॉम उद्योग से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक की। इसी बैठक में कंपनियों को नए आदेश से अवगत करा दिया गया। 3जी मोबाइल सेवाओं का मुख्य आकर्षण स्पष्ट वॉयस कॉल, वीडियो कॉल और डाटा सर्विसेज हैं। डाटा सर्विसेज के तहत ऑपरेटर तेज गति वाली इंटरनेट सेवाएं देने का दावा कर रहे हैं। सरकार इसी पर निगरानी की आवश्यकता महसूस कर रही है। वहीं, निजी टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि बीते दो साल से सरकारी टेलीकॉम ऑपरेटर- बीएसएनएल और एमटीएनएल 3जी सेवाएं दे रही हैं। लेकिन उनके लिए कभी ऐसा फरमान जारी नहीं किया गया, जबकि सुरक्षा से जुड़े ये मसले तब भी थे।

विकीपीडिया

दुनियाभर की जिज्ञासाओं को शांत करने वाली एकमात्र विश्व कोष वेबसाइट विकीपीडिया आर्थिक संकट की चपेट में है। विकीपीडिया के संस्थापक जिम्मी वालेस ने इसक ा इस्तेमाल करने वाले लोगों से मदद की अपील की है। बकौल वालेस विकीपीडिया को वित्तीय संकट से उबरने के लिए एक करोड़ 60 लाख डॉलर की जरूरत है। दुनियाभर में रोजाना 40 करोड़ लोग विकीपीडिया का इस्तेमाल करते हैं। वालेस ने कहा कि विकीपीडिया उस सार्वजनिक स्थान की तरह है, जहां दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाला व्यक्ति आ सकता है और अपना योगदान दे सकता है। यह वेबसाइट पूरी तरह से लोगों के लिए चलाई जाती है और इसमें काम करने वाले सभी लोग स्वैच्छिक कार्यकर्ता हैं। इस वेबसाइट से हजारों लेखक और संपादक जुड़े हंै, जिन्हें श्रम या अन्य किसी योगदान के लिए कोई भुगतान नहीं किया जाता है। वालेस ने कहा कि विकीपीडिया के उपभोक्ता अगर एक-एक डॉलर का भी दान करें तो जरूरत से 20 गुना ज्यादा राशि जमा हो सकती है। अभी तक एक करोड़ 12 लाख डॉलर मिल चुके हैं और अब मात्र 48 लाख डॉलर की और जरूरत है।

ब्रेडमैन के देश में सचिन सर्वश्रेष्ठ

सचिन तेंदुलकर के 50वें टेस्ट शतक की ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि उनके और डॉन ब्रेडमैन में से महान कौन है। ब्रेडमैन के देश में एक अखबार द्वारा कराए गए ऑनलाइन सर्वे में सचिन ने क्रिकेट के डॉन को पीछे छोड़ दिया है। सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने अपने ऑनलाइन सर्वे में सबसे महान क्रिकेटर : बे्रडमैन या तेंदुलकर? विषय पर लोगों को वोट करने के लिए कहा, जिसमें 2975 क्रिकेट प्रशंसकों ने अपना मत दिया। तेंदुलकर को 66 प्रतिशत मत मिले जबकि ऑस्ट्रेलियाई महान क्रिकेटर ब्रेडमैन के नाम 34 प्रतिशत वोट आए। अखबार में एक लेख के मुताबिक कई लोगों ने यह पूछा कि क्या मास्टर-ब्लास्टर और सर डॉन बे्रडमैन के बीच तुलना करना ठीक है क्योंकि दोनों अलग-अलग युग में खेले हैं। क्रिकेट लेखक डेनियल लुईस ने पूछा, तेंदुलकर की महानता काफी बढ़ गई है। 50 टेस्ट शतक जड़ने वाला पहला खिलाड़ी बनने के बाद यह बहस फिर से छिड़ गई है कि दोनों में से महान बल्लेबाज कौन है। क्या यह भारत के 37 वर्षीय लिटिल मास्टर हैं या फिर ऑस्ट्रेलिया के दिवंगत सर डोनाल्ड ब्रेडमैन? क्या इन दो अलग-अलग युग के दो खिलाडि़यों के बीच तुलना करना उचित है या नहीं? लुईस ने कहा, बे्रडमैन ने 80 पारियों में 29 शतक बनाए हैं, जो प्रत्येक शतक 2.76 पारी के हिसाब से बना है। वहीं तेंदुलकर के 50 शतक 286 पारियों में बने हैं, जिससे प्रत्येक सैकड़ा 5.72 पारी में बना है। फिर इसमें औसत भी काम करता है। बे्रडमैन का टेस्ट औसत 99.94 है, जो क्रिकेट आंकड़ों में सर्वश्रेष्ठ है जबकि तेंदुलकर का औसत 56.89 है। जो भी हो अब कंगारू भी मानने लगे हैं कि सचिन तेंदुलकर की उछाल के सामने ब्रेडमैन पीछे हो रहे हैं।

लड़कों को बुद्धिमान

लंबे समय से डॉक्टर कहते रहे हैं कि स्तनपान मां और शिशुओं दोनों के लिए बेहतर होता है। अब एक शोध में यह बात सामने आई है कि स्तनपान शिशुओं खास तौर से लड़कों को बुद्धिमान बनाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय दल ने शोध में पाया है कि स्तनपान बच्चों को 10 साल की उम्र तक पढ़ाई में सफलता हासिल करने में मदद करता है। इसका लड़कों पर ज्यादा प्रभाव होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार मां के दूध में मौजूद कुछ तत्व दिमाग के विकास में मददगार होते हैं क्योंकि लड़कों में दिमाग के विकास के लिए जिम्मेदार फीमेल हार्मोन की कमी होती है। शोधकर्ताओं ने बताया कि सीखते वक्त लड़के मां पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं। इससे यह समझा जा सकता है कि मां के दूध का लड़कों पर ज्यादा प्रभाव होता है। छह महीने या उससे ज्यादा वक्त तक लगातार स्तनपान का बच्चों खास तौर से लड़कों पर सकारात्मक प्रभाव देखा जा सकता है। द डेली टेलीग्राफ में इस शोध के मुख्य लेखक वेंडी ऑडी ने कहा, हमारा शोध इस बात की पुष्टि करता है कि कम से कम छह महीने तक स्तनपान कराना बच्चे की सेहत के लिए बेहतर है। मांओं को छह महीने और उससे ज्यादा स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इस शोध में करीब एक हजार बच्चों को शामिल किया गया था।

Monday, April 26, 2010

Friday, February 19, 2010

श्री साईं बाबा के ग्यारह वचन

जो शिरडी में आयेगा, आपद दूर भगाएगा ।। 1 ।।

चढे समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुःख की पीढ़ी पर ।। 2 ।।

त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त-हेतु दौड़ा आऊंगा ।। 3 ।।

मन में रखना दृढ़ विश्वास, करें समाधि पूरी आस ।। 4 ।।

मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो ।। 5 ।।

मेरी शरण आ खाली जाये, हो तो कोई मुझे बताये ।। 6 ।।

जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रुप हुआ मेरे मन का ।। 7 ।।

भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा ।। 8 ।।

आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वह नही हैं दूर ।। 9 ।।

मुझ में लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया ।। 10 ।।

धन्य-धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य ।। 11 ।।

Thursday, February 18, 2010

Ankit agrawal dankaur

नज़र हटती ही नहीं

हम तो उनकी बातो को सुनते थे बस उही गोर से
हमको कहा पता था की ये शरुआत है प्यार की
अब तो हालात ऐसे है की उनसे नज़र हटती ही नहीं
वो हमसे इतने खफा की हमारी ओर देखते ही नहीं
written by- ankit agrawal

Friday, February 12, 2010

Dankaur

पिछली शताब्‍दी के आरंभ में बाघों की आबादी करीब 40 हजार थी। अब उनमें से केवल 1411 भारत में बाकी बचे हैं। पिछले वर्ष भारत में 86 बाघों की जान गई। भारत में करीब 37 बाघ अभयारण्‍य हैं लेकिन इनमें से करीब 17 अब अपनी बाघों की आबादी को पूरी तरह खो चुकी हैं या खोने की कगार पर हैं।

क्‍या ये तथ्‍य भयावह नहीं लगते। बाघों की लगातार खत्‍म होती आबादी के कारण अब उनके अस्तित्‍व पर संकट मंडरा रहा है। इसलिए अब बाघों को बचाने की बात शुरू हो रही हैं। बाघों को बचाने और उनकी आबादी को बढ़ाने की कवायद शुरू हो रही है। दुनिया भर के पशु प्रेमी इस मुहिम में अपनी भूमिका निभाने को तैयार हो रहे हैं।

बाघों को बचाने की इस मुहिम का हिस्‍सा बनिए।

Motivation

1.हिम्मत से सच कहूँ तो बुरा मानते हैं लोग ,
रो - रो कर बात कहने की आदत नहीं रही||



2.जज़्बा कोई अख़लाक से बेहतर नहीं होता।
कुछ भी यहां इंसान से बढ़कर नहीं होता।
कोशिश से ही इंसान को मिलती है मंजिलें,
मुट्ठी में कभी बंद मुक़द्दर नहीं होता।

Thursday, February 11, 2010

क्या करोगे तुम?(मेरी जिंदगी का पहला खुद का लेख)

मुझे पढो तो ज़रा अहतियात से पढना क्योकि
वक़्त वो भी अजीब था जब तू मेरे करीब था.........

यादों की डगर में जब हो आशियाना हमारा
फूलो की ख़ुश्बू की तरह रहना सांसो मे हमारी........

रात के सन्नाटों में जब कोई दर्द छेड़े तराना
जब बुरा लगने लगे तुमको ये सारा जमाना.......

ख़ामोशियों की वो धीमी सी आवाज़ में सुनाना
लिखा है जिस गजल को इंतज़ार में मेरी.........

हर तरफ है दरिन्दे दुनिया में यू तो बस अब
मिले फिर भी कोई तुम्हे मुज जैसा तो........

लिखा है जिस गजल को इंतज़ार में मेरी
बस वही गजल आ के मुझे सुना जाना........

ज़िन्दगी प्यारी सही लेकिन हमे मरना तो है.......
फिर यादे सताएगी तुमको हमारी, रूह बनकर

क्या करोगे तब तुम उस ग़ज़ल के पन्नो का
लिखा है जिस गजल को इंतज़ार में मेरी...........
by- ankit agrawal

सपने सच होते रहगे

कहीं किसी शहर में एक छोटा लड़का रहता था. उसके पिता एक अस्तबल में काम करते थे. लड़का रोजाना देखता था कि उसके पिता दिन-रात घोड़ों की सेवा में खटते रहते हैं जबकि घोड़ों के रैंच का मालिक आलीशान तरीके से ज़िंदगी बिताता है और खूब मान-सम्मान पाता है. यह सब देखकर लड़के ने यह सपना देखना शुरू कर दिया कि एक दिन उसका भी एक बहुत बड़ा रैंच होगा जिसमें सैंकड़ों बेहतरीन घोड़े पाले और प्रशिक्षित किये जायेंगे.

दिन लड़के के स्कूल में सभी विद्यार्थियों से यह निबंध लिखने के लिए कहा गया कि ‘वे बड़े होकर क्या बनना और करना चाहते हैं’. लड़के ने रात में जागकर बड़ी मेहनत करके खूब लंबा निबंध लिखा जिसमें उसने बताया कि वह बड़ा होकर घोड़ों के रैंच का मालिक बनेगा. उसने अपने सपने को पूरे विस्तार से लिखा और 200 एकड़ के रैंच की एक तस्वीर भी खींची जिसमें उसने सभी इमारतों, अस्तबलों, और रेसिंग ट्रैक की तस्वीर बनाई. उसने अपने लिए एक बहुत बड़े घर का खाका भी खींचा जिसे वह अपने रैंच में बनाना चाहता था.

लड़के ने उस निबंध में अपना दिल खोलकर रख दिया और अगले दिन शिक्षक को वह निबंध थमा दिया. तीन दिन बाद सभी विद्यार्थियों को अपनी कापियां वापस मिल गयीं. लड़के के निबंध का परिणाम बड़े से लाल शब्द से ‘फेल’ लिखा हुआ था. लड़का अपनी कॉपी लेकर शिक्षक से मिलने गया. उसने पूछा – “आपने मुझे फेल क्यो किया?” – शिक्षक ने कहा – “तुम्हारा सपना मनगढ़ंत है और इसके साकार होने की कोई संभावना नहीं है. घोड़ों के रैंच का मालिक बनने के लिए बहुत पैसों की जरुरत होती है. तुम्हारे पिता तो खुद एक साईस हैं और तुम लोगों के पास कुछ भी नहीं है. बेहतर होता यदि तुम कोई छोटा-मोटा काम करने के बारे में लिखते. मैं तुम्हें एक मौका और दे सकता हूँ. तुम इस निबंध को दोबारा लिख दो और कोई वास्तविक लक्ष्य बना लो तो मैं तुम्हारे ग्रेड पर दोबारा विचार कर सकता हूँ”.

वह लड़का घर चला गया और पूरी रात वह यह सब सोचकर सो न सका. बहुत विचार करने के बाद उसने शिक्षक को वही निबंध ज्यों-का-त्यों दे दिया और कहा – “आप अपने ‘फेल’ को कायम रखें और मैं अपने सपने को कायम रखूंगा”.

बीस साल बाद शिक्षक को एक घुड़दौड़ का एक अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला देखने का अवसर मिला. दौड़ ख़त्म हुई तो एक वयक्ति ने आकर शिक्षक को आदरपूर्वक अपना परिचय दिया. घुड़दौड़ की दुनिया में एक बड़ा नाम बनचुका यह वयक्ति वही छोटा लड़का था जिसने अपना सपना पूरा कर लिया था.

कहते हैं यह एक सच्ची कहानी है. होगी. न भी हो तो क्या! असल बात तो यह है कि हमें किसी को अपना सपना चुराने नहीं देना है और न ही किसी के सपने की अवहेलना करनी है. हमेशा अपने दिल की सुनना है, कहनेवाले कुछ भी कहते रहें. खुली आंखों से जो सपने देखा करते हैं उनके सपने पूरे होते हैं.

अच्छा और बुरा गुलाम

एक बादशाह ने दो गुलाम सस्ते दाम में खरीदे. उसने पहले से बातचीत की तो वह गुलाम बड़ा बुद्धिमान और मीठा बोलने वाला मालूम हुआ. जब होंठ ही मिठास के बने हुए हों तो उनमें से शरबत के सिवाय और क्या निकलेगा? मनुष्य की मनुष्यता उसकी वाणी में भरी हुई ही तो है. बादशाह जब इस गुलाम की परीक्षा कर चुका तो उसने दूसरे को पास बुलाकर देखा तो पाया कि यह बहुत बदसूरत और गंदा है. बादशाह इसके चेहरे को देखकर खुश नहीं हुआ परन्तु उसकी योग्यता और गुणों की जांच करने लगा. पहले गुलाम को उसने नहा-धोकर आने के लिए कह दिया और दूसरे से कहा – “तुम अपने बारे में कुछ बताओ. तुम अकेले ही सौ गुलामों के बराबर हो. तुम्हें देखकर उन बातों पर यकीन नहीं होता जो तुम्हारे साथी ने तुम्हारे पीठपीछे कही हैं.”

गंदे गुलाम ने जवाब दिया – “उसने यदि मेरे बारे में कुछ कहा है तो सच ही कहा होगा. यह बड़ा सच्चा आदमी है. इससे ज्यादा भला आदमी मैंने और कोई नहीं देखा. यह हमेशा सच बोलता है. यह स्वभाव से ही सत्यवादी है इसलिए इसने जो मेरे संबंध में कहा है यदि वैसा ही मैं इसके बारे में कहूं तो झूठा दोष लगाना होगा. मैं इस भले आदमी की बुराई नहीं करुंगा. इससे तो यही अच्छा है कि मैं खुद को दोषी मान लूं. बादशाह सलामत, हो सकता है कि वह मुझमें जो ऐब देखता हैं वह मुझे खुद न दीखते हों।”

बादशाह ने कहा – “मैं तो चाहता हूं कि तुम भी इसकी कमियों का वैसा ही बखान करो जैसा इसने तुम्हारी कमियों का किया है जिससे मुझे इस बात का यकीन हो जाये कि तुम मेरी खुशी और सलामती चाहते हो और मुल्क को चलाने में मेरे काम आ सकते हो.”

गुलाम बोला – “बादशाह सलामत, इस गुलाम में सादगी और सच्चाई है. बहादुरी और बड़प्पन भी ऐसा है कि मौका पड़ने पर जान तक न्यौछावर कर सकता है। वह घमंडी नहीं है और अपनी गलतियों को खुद ही ज़ाहिर कर देता है. अपनी गलतियों को सामने लाना और ऐब ढूंढना हालांकि बुरा है तो भी वह दूसरे लोगों के लिए तो अच्छा ही है.”

बादशाह ने कहा – “अपने साथी की तारीफ़ में अति न करो और दूसरे की तारीफ़ करके खुद को तारीफ़ के काबिल नहीं बनाओ क्योंकि यदि मैंने तुम्हारा इम्तिहान लेने के लिए इसे बुला लिया तो तुम्हें शर्मिंदा होना पड़ेगा.”

गुलाम ने कहा – “नहीं, मेरे साथी की अच्छाइयां इससे भी सौ गुना हैं. जो कुछ मैं अपने दोस्त के बारे के संबंध में जानता हूं यदि आपको उसपर यकीन नहीं तो मैं और क्या अरज करूं!”

इस तरह बहुत सी बातें करके बादशाह ने उस बदसूरत गुलाम की अच्छी तरह परीक्षा कर ली और जब पहला गुलाम स्नान करके बाहर आया तो उसको अपने पास बुलाया. बदसूरत गुलाम को वहां से विदा कर दिया. उस सुंदर गुलाम के रूप और गुणों की प्रशंसा करके कहा – “पता नहीं, तुम्हारे साथी को क्या हो गया था कि इसने पीठ-पीछे तेरी खूब बुराई की!”

सुंदर गुलाम ने चिढ़कर कहा – “बादशाह सलामत, इस नामुराद ने मेरे बारे में जो कुछ कहा उसे ज़रा तफ़सील से मुझे बताइये.”

बादशाह ने कहा – “सबसे पहले इसने तुम्हारे दोगलेपन का जिक्र किया कि तुम सामने तो दवा हो लेकिन पीठ-पीछे दर्द हो.”

जब इसने बादशाह के मुंह से ये शब्द सुने तो इसका पारा चढ़ गया, चेहरा तमतमाने लगा और अपने साथी बारे में उसके मुंह में जो आया वह बकने लगा. वह बदसूरत गुलाम की बुराइयां करता ही चला गया तो बादशाह ने इसके होंठों पर हाथ रख दिया और कहा – “बस करो, हद हो गयी. उसका तो सिर्फ बदन ही गंदा है लेकिन तुम्हारी तो रूह भी गंदी है. तुम्हारे लिए तो यही मुनासिब है कि तुम उसकी गुलामी करो.”

[याद रखो, सुन्दर और लुभावना रूप होते हुए भी यदि मनुष्य में अवगुण हैं तो उसका मान नहीं हो सकता। और यदि रूप बुरा पर चरित्र अच्छा है तो उस मनुष्य के चरणों में बैठकर प्राण विसर्जन कर देना भी श्रेष्ठ है।]

जलालुद्दीन रूमी की किताब ‘मसनवी’ से लिया गया अंश.

चोर बादशहा का इन्साफ

गज़नी के बादशाह का नियम था कि वह रात को भेष बदलकर गज़नी की गलियों में घूमा करता था. एक रात उसे कुछ आदमी छुपते-छुपाते चलते दिखाई दिये. वह भी उनकी तरफ बढ़ा. चोरों ने उसे देखा तो वे ठहर गये और उससे पूछने लगे – “भाई, तुम कौन हो और रात के समय किसलिए घूम रहे हो?” बादशाह ने कहा – “मैं भी तुम्हारा भाई हूं और रोज़ी की तलाश में निकला हूं.” यह सुनकर चोर बड़े खुश हुए और कहने लगे – “यह बहुत अच्छा हुआ जो तुम हमसे आ मिले. जितने ज्यादा हों, उतनी ही ज्यादा कामयाबी मिलती है. चलो, किसी बड़े आसामी के घर चोरी करें”. जब वे लोग चलने लगे तो उनमें से एक ने कहा, “पहले यह तय कर लेना चाहिए कि कौन आदमी किस काम को अच्छी तरह कर सकता है, जिससे हम एक-दूसरे के हुनर को जान जाएं और जो ज्यादा हुनरमंद हो उसे नेता बनायें”.

यह सुनकर हर एक ने अपनी-अपनी खूबियां बतलायीं. एक बोला – “मैं कुत्तों की बोली पहचानता हूं. वे जो कुछ कहें, उसे मैं अच्छी तरह समझ लेता हूं. हमारे काम में कुत्तों से बड़ी अड़चन पड़ती है. हम यदि उनकी बोली जान लें तो हमारा ख़तरा कम हो सकता है और मैं इस काम को बड़ी अच्छी तरह कर सकता हूं”.

दूसरा कहने लगा – “मेरी आंखों में ऐसी ताकत है कि जिसे अंधेरे में देख लूं, उसे फिर कभी नहीं भूल सकता. और दिन के देखे को अंधेरी रात में पहचान सकता हूं. बहुत से लोग हमें पहचानकर पकड़वा देते हैं. मैं ऐसे लोगों को तुरन्त भांप लेता हूं और अपने साथियों को सावधान कर देता हूं. इस तरह हमारी हिफ़ाज़त हो जाती है”.

तीसरा बोला – “मुझमें ऐसी ताकत है कि मज़बूत दीवार में सेंध लगा सकता हूं और यह काम मैं ऐसी फुर्ती और सफाई से करता हूं कि सोनेवालों की आंखें नहीं खुलतीं और घण्टों का काम पलों में हो जाता है”.

चौथा बोला – “मेरी सूंघने की ताकत इतनी खास है कि ज़मीन में गड़े हुए धन को वहां की मिट्टी सूंघकर ही बता सकता हूं. मैंने इस काम में इतनी कामयाबी पाई है कि मेरे दुश्मन भी मेरी बड़ाई करते हैं. लोग अमूमन धन को धरती में ही गाड़कर रखते हैं. इस वक्त यह हुनर बड़ा काम देता है. मैं इस इल्म का पूरा जानकार हूं. मेरे लिए यह काम बड़ा आसान है”.

पांचवे ने कहा – “मेरे हाथों में ऐसी ताकत है कि ऊंचे-ऊंचे महलों पर बिना सीढ़ी के चढ़ सकता हूं और ऊपर पहुंचकर अपने साथियों को भी चढ़ा सकता हूं. तुममें तो कोई ऐसा नहीं होगा, जो यह काम कर सके।”

इस तरह जब सब लोग अपने-अपने हुनर बता चुके तो नये चोर से बोले – “तुम भी अपना कमाल बताओ, जिससे हमें अन्दाज हो कि तुम हमारे काम में कितने मददगार हो सकते हो”. बादशाह ने जब यह सुना तो खुश हो कर कहने लगा – “मुझमें ऐसा इल्म है, जो तुममें से किसी में भी नहीं है. और वह इल्म यह है कि मैं गुनाहों को माफ़ कर सकता हूं. अगर हम लोग चोरी करते पकड़े जायें तो अवश्य सजा पायेंगे लेकिन मेरी दाढ़ी में यह खूबी है कि उसके हिलते ही सारे गुनाह माफ़ हो जाते हैं. तुम चोरी करके भी साफ बच सकते हो. देखो, कितनी बड़ी ताकत है मेरी दाढ़ी में.”

बादशाह की यह बात सुनकर सबने एक सुर में कहा – “भाई तू ही हमारा नेता है. हम सब तेरी ही इशारों पर काम करेंगे ताकि अगर कहीं पकड़े जायें तो बख्शे जा सकें. ये हमारी खुशकिस्मती है कि तुझ-जैसा हुनरमंद साथी हमें मिला”.

इस तरह मशवरा करके ये लोग वहां से चले. जब बादशाह के महल के पास पहुंचे तो कुत्ता भूंका. चोर ने कुत्ते की बोली पहचानकर साथियों से कहा कि यह कह रहा है कि बादशाह पास ही हैं इसलिए होशियार होकर चलना चाहिए. मगर उसकी बात किसीने नहीं मानी. जब नेता आगे बढ़ता चला गया तो दूसरों ने भी उसके संकेत की कोई परवाह नहीं की. बादशाह के महल के नीचे पहुंचकर सब रुक गये और वहीं चोरी करने का इरादा किया. दूसरा चोर उछलकर महल पर चढ़ गया और फिर उसने बाकी चोरों को भी खींच लिया. महल के भीतर घुसकर सेंध लगायी गई और खूब लूट हुई. जिसके जो हाथ लगा, समेटता गया. जब लूट चुके तो चलने की तैयारी हुई. जल्दी-जल्दी नीचे उतरे और अपना-अपना रास्ता लिया. बादशाह ने सबका नाम-धाम पूछ लिया था. चोर माल-असबाब लेकर चंपत हो गये.

बादशाह ने अपने मंत्री को आज्ञा दी कि तुम अमुक स्थान में तुरन्त सिपाही भेजो और फलां-फलां लोगों को गिरफ्तार करके मेरे सामने हाजिर करो. मंत्री ने फौरन सिपाही भेज दिये. चोर पकड़े गये और बादशाह के सामने पेश किये गए. जब इन लोगों ने बादशाह को देखा तो एक-दूसरे से कहा – “बड़ा गजब हो गया! रात चोरी में बादशाह हमारे साथ था.” और यह वही नया चोर था, जिसने कहा था कि “मेरी दाढ़ी में वह शक्ति है कि उसके हिलते ही अपराध क्षमा हो जाते हैं।”

सब लोग साहस करके आगे बढ़े और बादशाह के सामने सज़दा किया. बादशाह ने उनसे पूछा – “तुमने चोरी की है?”

सबने एक साथ जवाब दिया – “हां, हूजर. यह अपराध हमसे ही हुआ है।”

बादशाह ने पूछा – “तुम लोग कितने थे?”

चोरों ने कहा – “हम कुल छ: थे।”

बादशाह ने पूछा – “छठा कहां है?”

चोरों ने कहा – “अन्नदाता, गुस्ताखी माफ हो। छठे आप ही थे।”

चोरों की यह बात सुनकर सब दरबारी अचंभे में रह गये. इतने में बादशाह ने चोरों से फिर पूछा – “अच्छा, अब तुम क्या चाहते हो?”

चोरों ने कहा – “अन्नदाता, हममें से हर एक ने अपना-अपना काम कर दिखाया. अब छठे की बारी है. अब आप अपना हुनर दिखायें, जिससे हम अपराधियों की जान बचे।”

यह सुनकर बादशाह मुस्कराया और बोला – “अच्छा! तुमको माफ किया जाता है. आगे से ऐसा काम मत करना”.

जलालुद्दीन रूमी की किताब मसनवी से ली गई कहानी.

Monday, January 18, 2010

Dankaur Kavi

गिनने लगा

मुफलिसी में, घर में सबकी ख़ामियाँ गिनने लगा
हद तो ये, मैं बालकों की रोटियाँ गिनने लगा

देख ले

मिट गये हम उफ़ न की है देख ले
किस कदर दीवानगी है देख ले
ज़िन्दगी भर साथ देने की कसम
यार पूरी ज़िन्दगी है देख ले
ये हवेली कल शहर की शान थी
आज ये सूनी पड़ी है देख ले

इससे पहले मैक़दा हो जाये बन्द
ख़त्म है या कुछ बची है देख ले


written by-pawan dixit(lives in dankaur)
he is a GREAT POET who is shinning far right now.